कहते हैं की खाली नही बैठना चाहिए। इसको ऐसे भी कह सकते हैं कि हर समय कुछ ना कुछ कर्म करते रहना चाहिए। पर क्या यह उचित है?
क्योंकि हम पूरी तरह से समझे हुए नही हैं, जब समझे नहीं हैं, तो जो कर्म करेंगे वह जरूरी नहीं है कि सही ही करें। अब अनजाने में गलत कर्म हुआ तो प्रकृति का नियम है की उसका फल मिलेगा ही। मतलब गलत बीज बो दिया तो उसका पेड़ तो बनेगा ही।
पर जो लोग साथ ही साथ अच्छे कर्म भी करते रहते हैं तो अच्छा फल भी मिलता ही रहता है।
इसलिए आज कल व्यक्ति परेशान होता है, फिर खुश होता है। बार बार दुखी, बार बार सुखी होता है व्यक्ति।
लेकिन कहीं भी आगे पहुंचता नही है व्यक्ति समझ के मामले में। पैसे के मामले में आगे बढ़ता दिखाई देता है, पर वो पैसा तो इसी धरती का है, और इसी धरती पर छोड़कर चला जाता है।
जीवन के अंत तक मनुष्य ज्ञान आनंद प्रेम को प्राप्त नहीं कर पाता, फिर दुखी रहकर ही जीवन इस शरीर को छोड़ कर फिर नए शरीर की तैयारी करता है। और जिस धरती को इतना प्रदूषित किया फिर उसी धरती पर जन्म लेता है और अपनी यात्रा शुरुआत करता है।
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